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हिमाचल के बल्क ड्रग पार्क को मिली रफ्तार, राज्यसभा में उठा मुद्दा; 1000 करोड़ की परियोजना में तेजी से चल रहा निर्माण

हरोली के बल्क ड्रग पार्क को पर्यावरण मंजूरी के बाद मिली रफ्तार
1000 करोड़ की केंद्रीय सहायता से विकसित हो रहा है पार्क
जलापूर्ति का 60%, सड़क नेटवर्क का 10% काम पूरा


शिमला। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के हरोली में विकसित किए जा रहे बल्क ड्रग पार्क की प्रगति का मुद्दा राज्यसभा में उठा है। राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने परियोजना की मौजूदा स्थिति और निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी सदन में दी। सरकार के अनुसार पर्यावरण मंजूरी मिलने के बाद बल्क ड्रग पार्क में निर्माण कार्यों ने रफ्तार पकड़ी है

केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि हरोली में विकसित हो रहे इस महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रोजेक्ट के लिए 1000 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता स्वीकृत की गई है। परियोजना का उद्देश्य बल्क ड्रग और फार्मास्युटिकल क्षेत्र के लिए जरूरी साझा आधारभूत ढांचा तैयार करना है। निर्माण कार्यों की नियमित समीक्षा की जा रही है, ताकि परियोजना को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जा सके।

जलापूर्ति का 60 फीसदी काम पूरा

परियोजना के तहत विकसित की जा रही जलापूर्ति प्रणाली का करीब 60 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इसके अलावा सड़क नेटवर्क और कंपाउंड वॉल का लगभग 10 प्रतिशत काम पूरा किया गया है। वहीं स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज नेटवर्क का करीब 12 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।

बल्क ड्रग पार्क जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र में पानी, सड़क, बिजली और जल निकासी जैसी सुविधाओं को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निर्माण कार्य आगे बढ़ने के साथ इन साझा सुविधाओं को तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

1000 करोड़ की केंद्रीय सहायता, पहली किस्त जारी

रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लिखित जवाब में बताया कि केंद्र सरकार ने 11 अक्तूबर 2022 को परियोजना के लिए 1000 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता को मंजूरी दी थी। इसके बाद पहली किस्त के रूप में 225 करोड़ रुपये 20 फरवरी 2023 को जारी किए जा चुके हैं।

परियोजना में हिमाचल प्रदेश सरकार की भी हिस्सेदारी है। राज्य सरकार ने अपने हिस्से के 118.46 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं, जिसमें से 35.53 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।

पार्क में तैयार होंगी कई साझा सुविधाएं

हरोली में प्रस्तावित बल्क ड्रग पार्क में दवा उद्योगों को आवश्यक साझा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कई महत्वपूर्ण ढांचों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें जलापूर्ति प्रणाली, विद्युत अवसंरचना, कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) विद जीरो लिक्विड डिस्चार्ज, स्टीम जनरेशन सिस्टम, कॉमन वेयरहाउस और सॉल्वेंट रिकवरी सिस्टम शामिल हैं।

इसके अलावा परियोजना में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसी सुविधाएं भी विकसित की जानी हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य पार्क में स्थापित होने वाली औद्योगिक इकाइयों को आवश्यक साझा आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

कई प्रमुख परियोजनाओं की टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ी

केंद्र सरकार के जवाब के अनुसार पार्क में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, स्टीम सिस्टम और कॉमन वेयरहाउस समेत कई प्रमुख सुविधाओं के लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं। कुछ अन्य परियोजनाओं की निविदा प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

इसके साथ ही एडवांस्ड लेबोरेटरी टेस्टिंग सेंटर सहित अन्य महत्वपूर्ण सुविधाओं को विकसित करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। इससे पार्क में आने वाली औद्योगिक इकाइयों के लिए आवश्यक परीक्षण और साझा सेवाओं का ढांचा तैयार करने में मदद मिलेगी।

परियोजना की अवधि वित्त वर्ष 2026-27 तक बढ़ी

केंद्र सरकार ने बताया कि परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए इसकी नियमित समीक्षा की जा रही है। योजना की अवधि को अब वित्त वर्ष 2026-27 तक बढ़ाया गया है

हरोली में बल्क ड्रग पार्क को हिमाचल के औद्योगिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण परियोजनाओं में गिना जा रहा है। परियोजना के निर्माण कार्यों में तेजी आने के बाद अब इसकी विभिन्न साझा आधारभूत सुविधाओं को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने पर जोर है। राज्यसभा में परियोजना की प्रगति का मुद्दा उठने के बाद केंद्र की ओर से सामने आई जानकारी से इसके निर्माण की मौजूदा स्थिति भी स्पष्ट हुई है।